11 SEO Facts जो आपको पता होने चाहिए

SEO FACTS

SEO facts क्या है ?

SEO के बारे में आज इंटरनेटपर आज बहुत सारी जानकारी उपलब्ध है। मौजूदा जानकारी ज्यादातर SEO कैसे किया जाता है इसपर आधारित है। गूगल की रैंकिंग फैक्टर्स में २०० से भी ज्यादा फैक्टर्स है जिनके सहारे वेबसाइटस को रैंकिंग दिया जाता है। इनमें बैकलिंक सबसे ऊपर है उसके बाद कंटेंट, मेटा डिस्क्रिप्शन, इमेज ऑप्टिमाइजेशन, हैडिंग इ. फैक्टर्स आते है। SEO के बारे में जितना जाने उतना कम ही है। हर रोज नयी अपडेट आती रहती है, अल्गोरिथम चेंज होता रहता है। इसके साथ साथ SEO facts को लेकर बहुत सारी ऐसी जानकारी भी निकलके सामने आती है जो काफी हद तक झूठ ही होती है। लेकिन बहुत सारे लोग इसको सच मानके बैठे होते है। इस पोस्ट में हम कुछ ऐसेही SEO facts के बारे में जानेंगे जो ज्यादातर लोग जानते नहीं।

१. हर किसी सर्च इंजिन के लिए बैकलिंकही रैंकिंग फैक्टर नहीं होता।

जी हाँ !

SEO facts की बात हो रही हो और इसका जिक्र ना हो ऐसा हो ऐसा कभी नहीं सकता। आज दुनियामें गूगल के सिवाय बहुत सारे सर्च इंजिन्स है। 

search engine stat

Netmarketshare के मुताबिक २०१९ तक गूगल के उपयोगकर्ताओंकी की संख्या तक़रीबन ८३.३६ प्रतिशत है जहाँ पे बाकि सर्च इंजिन का योगदान १६.६४ प्रतिशत है। यहाँ पे हम बिलकुल देख सकते है की गूगल कितना लोकप्रिय है।

लेकिन, बाकि जो ज्यादा इस्तेमाल किये जाने वाले सर्च इंजिन्स है जैसे की बैदु, बिंग, याहू, यांडेक्स, इ. इनका भी दिनभर का ट्रैफिक अच्छा खासा रहता है।

statista

Statista के मुताबिक आज दुनिया भर में ४.४ बिलियन के आसपास लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते है। 

मान लीजिये इसमें से ३-४ बिलियन लोग गूगल का इस्तेमाल करते है फिर भी १ बिलियन लोग बचते है जो बाकि सर्च इंजिन का इस्तेमाल करते है। १ बिलियन लोग बहुत होते है।

मजे की बात ये है की गूगल छोड़ के इन्ह बाकि सर्च इंजिन के रैंकिंग फैक्टर में बैकलिंक का समावेश नहीं होता है। आप खुद इसे चेक कर सकते है। अगर आपकी कोई भी पोस्ट कम बैकलिंक होने के कारन गूगल के अंदर रैंक नहीं हो रही है तो आप उस कीवर्ड को बाकि सर्च इंजन में जरूर चेक करे। आपको पहले पेज पर रिजल्ट जरूर मिलेगा।

इसे ये साबित हो जाता है की बैकलिंक के बिना भी बाकि सर्च इंजिन में हम रैंक कर सकते है।

२. कोई भी SEO एजेंसी कम समय आपकी वेबसाइट रैंक नहीं कर सकती

SEO facts में दूसरे नंबर पर आते है SEO एजेंसी के तथ्य। आज मार्केट में बहुत सारी ऐसी एजेंसी है जो ये दावा करती है की वे आपकी वेबसाइट को कम समय रैंक कर सकती है। लेकिन ज्यादातर केसेस में ऐसा नहीं होता।

SEO एक लम्बी प्रक्रिया है जिसमें बहुत समय जाता है। आज आपने SEO किया और दूसरे दिन आपकी वेबसाइट रैंक करने लग जाये ऐसा कभी नहीं होता।

हर सर्च इंजन के पास एक अल्गोरिथम होता है। किसी भी सर्च इंजिन के अल्गोरिथम को समझना लगभग ना के बराबर है। दरअसल अल्गोरिथम एक प्रोग्राम होता है जो वेबसाइट की रैंकिंग तय करता है।

इस अल्गोरिथम में बहुत सारे ऐसे फैक्टर्स होते है जो किसी भी SEO एक्सपर्ट को पता नहीं होते। और ये अल्गोरिथम हमेशा अपडेट होते रहते है जिसके तहत कोई भी वेबसाइट हमेशा के लिए नंबर १ स्थान पर नहीं रह पाती।

दरअसल यहाँ पे ऐसा कोई शार्ट कट नहीं है जिससे बहुत कम समय में रैंक करने लगे। ब्लैक हैट तकनीक का इस्तेमाल करके ऐसा कर सकते है लेकिन कुछ देर तक ही इसका परिणाम दिखाई देता है क्यों की इस तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए सर्च इंजिन के खिलाफ जाना पड़ता है।

इसलिए अगर आपको लगता है की किसी SEO एजेंसी की मदद से आप जल्द रैंक कर सकते है तो आप ये एक आपकी गलतफैमि है

३. किसीभी SEO टूल द्वारा दी गयी जानकारी १०० % सही नहीं होती 

इस SEO facts के बारें में जानना हर एक ब्लॉगर की जरुरत है।

Ahref टूल के बारें में तो हर कोई जानता होगा। दुनिया में जितने भी ब्लॉगर्स है वे सब इसका इस्तेमाल करते है। इसके आलावा SEMrush, MOZ, WOOrank इ. बहुत सारे ऐसे टूल्स है जो आपको बाकि वेबसाइट के बारें में जानकारी प्रदान करते है।

अगर आप इन सब टूल्स का इस्तेमाल करते है तो आपने भी ये नोटिस किया होगा की इन टूल्स द्वारा दी गयी जानकारी एकजैसी नहीं होती। ऐसा क्यों होता है ?

क्योंकि हर टूल्स की मेट्रिक अलग होती है, डेटाबेस अलग होता है। लेकिन ये सब टूल्स जो जानकारी इकठ्ठा करते है उनका मुख्य स्त्रोत गूगल ही रहता है। इसलिए आप हद से ज्यादा इन टूल्स पर निर्भर नहीं रह सकते। 

हालांकि हमारे पास कोई विकल्प नहीं होता लेकिन एक बात समझलो की गूगल की अल्गोरिथम को समझना न के बराबर है इसलिए आप कुछ हद तक ही इन टूल्स को गंभीर लो।

४. ज्यादा बैकलिंक बनानेसे वेबसाइट रैंक नहीं होती 

आपकी की नजर में बैकलिंक क्या है ?

गूगल की नजर में बैकलिंक क्या है ?

देखा जाये तो इन दोनों सवालों के जवाब एकही होने चाहिए लेकिन बदक़िस्मतीसे ऐसा नहीं है !

ऐसा क्यों ?

क्योंकि हमने बैकलिंक की सिर्फ डेफिनेशन जानी है, गूगल उसे किस नजर से देखता है ये जानने की कोशिश सिर्फ चंद लोग ही करते है। गूगल बैकलिंक को एक रैंकिंग फैक्टर की नजर से देखता है जो ढेर सारे फैक्टर्स में से एक है और हम सिर्फ बैकलिंक को ही रैंकिंग फैक्टर मान बैठे है।

क्यूंकि हम ये मान बैठे है, हमारे दिमाग में सिर्फ एक बात है की बैकलिंक बनानी पड़ेगी नहीं रैंक नहीं कर पाएंगे। ऐसी हालत में पुरा जोर लगाके बैकलिंक बनाते जाते है।

देखिये यहाँ पे एक बात ध्यान में रखना बहुत जरुरी है की सिर्फ बैकलिंक बनाएंगे तो काम नहीं बनेगा। यहाँ आपकी वेबसाइट सिर्फ उन्ही बैकलिंक के आधार पर रैंक करेगी जो ज्यादा रिलेवेंट याने की संबधित है।

मतलब बाकी जो आपने कचरा बनाके रखा है उसकी कीमत जीरो है। दरअसल आपके दिमागमें ये बहुत अच्छी तरह से फिट हुआ होता है की बैकलिंक बनानी है तो आप कोई भी अवसर नहीं छोड़ते जिसके कारण स्पैम वेबसाइट पर भी बैकलिंक बना देते है।

स्पैम वेबसाइट पर बैकलिंक बनाने का मतलब है सर्च इंजिन को आपकी वेबसाइट पेनलाइज़ करने के लिए आमंत्रित करना। बैकलिंक की क्वालिटी अक्सर उस वेबसाइट का स्पैम स्कोर, DA और PA पर निर्भर करता है इसलिए अगर आपको बैकलिंक की मदद से रैंक करना है तो आपको सिर्फ क्वालिटी बैकलिंक के ऊपर ही ध्यान देना  होगा।

SEO facts की लिस्ट में ये एक ऐसा तथ्य है जो हर कोई जानता है लेकिन अमल नहीं करता।

५. गूगल पर वेबसाइट की PPC advertise चलाने से organic ranking में सुधारना नहीं होती 

PPC advertise क्या होती है ?

जब कोई वेबसाइट आर्गेनिक तरीकेसे रैंक करने में असफल होती है याफिर उस वेबसाइट का मार्केटिंग बजेट ज्यादा होता है तो वेबसाइट गूगल को पैसे दे के किसी विशिष्ट कीवर्ड के ऊपर advertis चलाती है।

ऐसे में वह वेबसाइट उस कीवर्ड के ऊपर रैंक करने लगती है। लेकिन जैसे ही उनका बजेट ख़तम होता है तो उस वेबसाइटका सर्च इंजिन रिजल्ट पेज पर पहले स्थानपर आना बंद हो जाता है। इसके बाद वह वेबसाइट उस स्थान पर पहुँच जाती है जहाँ पे उसे आर्गेनिक तरीकेसे होना चाहिए।

लेकिन यहाँ पे बहुत लोगोंमें ये गलतफैमि है की कुछ महीनो तक ऐसे advertise करने से वेबसाइट की आर्गेनिक रैंकिंग में सुधार आ जाता है। आप को ये बात समझनी होगी की advertise करनेसे आपकी वेबसाइट गूगल के अल्गोरिथम को संतुष्ट करती है ऐसा नहीं होता।

सर्च इंजिन अल्गोरिथम PPC advertise से पूरा अलग है। पुरे साल भी अगर आप PPC advertise चलाते है तो उसे आपकी आर्गेनिक रैंकिंग में कोई ज्यादा फरक नहीं पड़ता। अगर आपको आर्गेनिक तरीकेसे रैंक कराना है तो SEO करना ही पड़ेगा।

६. रैंकिंग के लिए हर हफ्ते १ या २ आर्टिकल पब्लिश करना जरुरी नहीं है 

“अगर आपको सर्च इंजिन रिजल्ट पेज में स्थान प्राप्त करना है तो आपको हर हफ्ते १-२ आर्टिकल पब्लिश करने पड़ेंगे।”

आपने कंटेंट के बारे में ऐसेही और बहुत सारे SEO facts पढे होंगे लेकिन इसमें सच्चाई बहुत कम है। मैंने अक्सर ऐसे ब्लॉगर्स को भी देखा है जो पुरे महीने में सिर्फ एकही आर्टिकल पब्लिश करते है फिर भी सर्च इंजिन रिजल्ट के पहले पेज में रैंक करते है।

देखिये, अगर आप नए ब्लॉगर है तो इसे फॉलो कर सकते है लेकिन जैसे जैसे आपका DA और PA बढ़ जायेगा, इसकी जरुरत नहीं होगी। मैंने खुद इस बात को नोटिस किया है।

शुरुवात में जब ब्लॉग पब्लिश करते है तो हमारे पास बहुत सारे टॉपिक्स होते है जिसपर हम भर भर के लिख सकते है। ऐसे २० – ३० आर्टिकल लिखने के बाद हमें टॉपिक मिलने में थोड़ी दिक्कत है। ऐसे में हम हफ्ते में १-२ आर्टिकल लिखने के चक्कर में कुछ भी लिख देते है जिससे यूजर एक्सपीरियंस ख़राब हो जाता है। 

इसलिए अगर आप भी इसके बारे में सोच रहे है तो टेंशन लेने की जरूरत नही है।

७. वेबसाइट सर्च इंजिन में सबमिट करनेसे रैंकिंग में कोई फरक नहीं पड़ता 

इंटरनेट पर आज बहुत सारी ऐसी एजेंसी मिल जाएगी जो आपकी वेबसाइट सर्च इंजिन में सबमिट करने के लिए हजारों रुपियों की  मांग करेगी।

मैंने बहुत लोगों देखा भी है जो सिर्फ वेबसाइट सर्च इंजिन में सबमिट करने के लिए ढेर सारे पैसे खर्चा कर देते है। क्यूंकि उनको लगता है की हमें सर्च इंजिन में ही रैंक करना है तो वहाँ पे सबमिट करने से जल्दी रैंक मिल जायेगा। लेकिन इसका कोई कनेक्शन नहीं है।

वेबसाइट सबमिट करने का उद्देश्य सिर्फ यही होता है की सर्च इंजिन के क्रॉलर्स आपके वेबसाइट की तरफ ध्यान दे। उन्हें एक तरह का आमंत्रण दिया  जाता है की हमने नयी वेबसाइट बनायीं है और आप आके वेबसाइट इंडेक्स करें। बस इतनाही काम सर्च इंजिन सबमिशन के तहत किया जाता है। इसके अलावा अन्य कोईभी फायदा नहीं मिलता।

क्या बिना सर्च इंजिन सबमिशन के वेबसाइट इंडेक्स होती है ?

बिलकुल होती है।

दरअसल सर्च इंजिन क्रॉलर्स इंटरनेट पर २४ घंटे घूमते रहते है। ऐसे में जब नयी वेबसाइट लॉन्च होती है उसे भी क्रॉल किया जाता है। वेबसाइट नयी होने के कारन क्रॉलर्स को वेबसाइट पर आने में थोड़ा समय लग सकता है।

मतलब सर्च इंजिन सबमिशन के कारन आपकी वेबसाइट जल्द से इंडेक्स हो जाती है बस यहीं एक फायदा है। इसलिए सर्च इंजिन में वेबसाइट सबमिट करना अच्छा है लेकिन इसका रैंकिंग साथ कोई कनेक्शन  नहीं है

८. SEO की शुरुवात कंटेंट लिखने से पहले शुरू होती है 

जब मैं नौसिखिया था ब्लॉगिंग में तो अक्सर ये गलती करता था। मुझे लगता आर्टिकल पब्लिश करने बाद आरामसे SEO कर लूंगा। 

लेकिन धीरे धीरे समझ आने लगा की SEO की शुरुवात तो कंटेंट लिखने से पहले होती है। मतलब एक आर्टिकल लिखने के लिए जो कीवर्ड हम ढूंढते है वह भी एक ऑन पेज SEO का ही हिस्सा है।

दरअसल ऑन पेज SEO बहुत सारा हिस्सा कंटेंट लिखने से पहले ही शुरू होता है जैसे टाइटल, मेटा डिस्क्रिप्शन, यूआरएल स्ट्रक्चर इ.।

इसके साथ साथ मुख्य कीवर्ड को जगह जगह टारगेट करना, मीडिया अपलोड करते समय ऑप्टिमाइज़ करना, हेडिंग का ध्यान रखना इ. ये सब कंटेंट लिखते समय कर सकते है जिससे बहुत समय बच जाता है

९. नो फॉलो बैकलिंक की भी

वैल्यू होती है

आज SEO सेक्टर में बैकलिंक की बारे चर्चे होते है की नो फॉलो बैकलिंक हमें बनानी चाहिए या नहीं, इसकी कोई वैल्यू है भी या नहीं इ.क्यूंकि नो फॉलो बैकलिंक को सिर्फ विजिटर्स फॉलो करते है और सर्च इंजिन के क्रॉलर्स फॉलो नहीं करते, हमें लगता है की भला इसका का क्या उपयोग हो सकता है?

लेकिन सच्चाई तो यही है की जितनी कीमत डु फॉलो बैकलिंक की होती है उतनीही कीमत नो फॉलो बैकलिंक को भी होती है।

देखिये अगर आप सिर्फ डु फॉलो बैकलिंकही बनाते है तो ये स्पैम माना जाता है। क्यूंकि बैकलिंकिंग नेचुरल तरीकेसे दिखाने के लिए आपकी बैकलिंक प्रोफाइल में दोनों लिंक का होना अनिवार्य है।

इसलिए आप नो फॉलो बैकलिंक्स को गलतीसे भी नजरअंदाज मत करे।

१०. ज्यादा कंटेंट लिखने से ब्लॉग

रैंक नहीं करता 

क्या आपको पता है, सर्च इंजिन रिजल्ट पेज पर रैंक होने वाले पहले १० रिजल्ट की जो वेबसाइट होती है उनका कंटेंट लगभग १९०० शब्दों का होता है?

लेकिन कंटेंट कितना लम्बा होना चाहिए ये सिर्फ और सिर्फ कीवर्ड पे निर्भर करता है। यहाँ पे लोगों के इंटेंशन को समझना बहुत जरुरी होता है। आप हर कीवर्ड के ऊपर १९०० शब्दों का आर्टिकल नहीं लिख सकते, लोगों को उसकी जरुरत भी नहीं है।

मान लीजिये एक कीवर्ड है Airtel customer care no.  जिसके लाखो सर्चेस है और CPC भी बढ़िया है। यहाँ इस कीवर्ड पर आप १९०० शब्दों का आर्टिकल नहीं लिख सकते। फिर भी आपने कुछ जुगाड़ कर के लिख भी लिया  तो उसे पढ़ेगा कौन? क्यूंकि Airtel customer care no. सर्च करने के पीछे विजिटर्स का इंटेंशन होता है उन्हें सिर्फ एक नंबर दिखाया जाये, न की पूरा बेकार आर्टिकल।

इसलिए ऐसे इंटेंशन को समझना भी बहुत जरुरी है। कुछ कीवर्ड्स ऐसे भी  होते है जिनके ऊपर ५००० शब्दों तक का भी आर्टिकल लिखा जाये तो भी वह अधूरा लगता है। जैसे की कोई काम करने की प्रक्रिया याफिर कोई गाइड इ.। ऐसे कीवर्ड्स में लोगों का इंटेंशन होता है की उन्हें पूरी प्रक्रिया दिखाई जाये वो भी स्टेप बाय स्टेप। अगर आप ऐसे कीवर्ड्स के ऊपर लिखते है तो २००० शब्दों से ज्यादा ही लिखना पड़ेगा।

कभी कबार ऐसा भी हो सकता है की आपने जो कीवर्ड चुना है उसका जवाब या जानकारी सिर्फ २०० शब्दों तक ही लिखनी पड़े। इसलिए आप विजिटर्स के इंटेंशन को समझके ही आर्टिकल लिखिए।

११. डुप्लीकेट कंटेंट की वजह से वेबसाइट पेनलाइज़ नहीं होती

शुरुवातसे मैं अक्सर सुनता आया हूँ की अगर हम किसी वेबसाइट का कंटेंट कॉपी करके हमारी वेबसाइट पर पब्लिश करते है तो हमारी वेबसाइट पेनलाइज़ हो जाती है।

देखिये, डुप्लीकेट कंटेंट एक ब्लैक हैट तकनीक है लेकिन ये इतनी भी बुरी नहीं है की जिससे वेबसाइट पेनलाइज़ किया जाये। आज इंटरनेट पर बहुत सारे डुप्लीकेट कंटेंट मिल जायेंगे जो पेनलाइज़ नहीं हुए है।

दरअसल डुप्लीकेट कंटेंट की वजह से रैंकिंग पे जरूर असर पड़ता है। क्यूंकि एक ही कंटेंट बहुत जगह दिखने पर सर्च इंजिन क्रॉलर्स कंफ्यूज हो जाते है। ऐसे बहुत कम लोग होंगे जो पूरा कंटेंट कॉपी करके जैसा है वैसा ही पब्लिश करते होंगे।

इसलिए अगर आप भी डुप्लीकेट कंटेंट का इस्तेमाल करते है तो पेनलाइज़ का टेंशन मत ले।

तो ये थे कुछ ऐसे SEO facts जिनके बारें में नए ब्लॉगर्स को जानना बहुत जरुरी हैं।

वैसे औरभी बहुत सारे SEO facts है लेकिन ये ऊपर दिए गए तथ्य आपको पताही होने चाहिए अगर आप SEO की बारे में जानकारी प्राप्त करने में रूचि रखते है। आप अगर नए हो तो ठीक है आप कुछ गलतफैमिओ पर विश्वास कर सकते है , लेकिन अगर १-२ सालसे SEO के बारें में जानते है तो आपको SEO facts के बारें में पूरी जानकारी होनी ही चाहिए। क्यूंकि इन सालों में आप इनकी जाँच की होती है और आप ऐसेही की मिथ के ऊपर आँख बंद करके विश्वास नहीं कर सकते है। इसलिए आप इसके बारें में प्रयोग करते रहिये।

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