Google Algorithm – एक पहेली

Google algorithm

Algorithm एक नियमों का समूह होता है जो बड़ी बड़ी समस्या सुलझाने में काम आता है।

मुझे आज भी याद है जब मैं दसवीं कक्षा में पढ़ रहा था वहाँ पे maths के problems सुलझाने के लिए algorithm का इस्तेमाल किया जाता था। तब भी ये एक पहेली थी।

मैं थोड़ा बड़ा हो गया मेरे हाथ एक Rubik cube लग गया जो भी एक algorithm के बिना सुलझ नहीं जाता।

आज मैं ब्लॉगिंग में हूँ और यहाँ पे गूगल का algorithm आ गया।  मतलब algorithm ही जो आपको बड़े बड़े प्रोब्लेम सुलझाने के लिए मदद करता है।

यहाँ भी गूगल का algorithm आपकी समस्या सुलझा सकता है।

जी हाँ। 

मैं बात कर रहा हूँ रैंकिंग की समस्या। अगर आपको गूगल की सर्च इंजिन रिजल्ट पेज में पहले नंबर पे आना चाहते है तो आप को भी ये algorithm समझना बहुत जरुरी है।

यहाँ पे आप बोलेंगे की रैंकिंग के लिए तो SEO जरुरी हैं लेकिन SEO की प्रोसेस भी सर्च इंजिन की algorithm को संतुष्ट करने के लिए ही किया जाता हैं। अगर आप की वेबसाइट इस algorithm को संतुष्ट करती है तो आपकी रॅंकिंग भी १०० % हो जाएगी।

लेकिन ये algorithm क्यों बनाया गया हैं ? इसकी जरुरत क्या थी ?

मान लीजिये मैंने और बाकी १० लोगोने एकही कीवर्ड के ऊपर पोस्ट लिखी हैं। ये कीवर्ड है SEO। अब विजिटर्स जब गूगल में “SEO” टाइप करेंगे तो ये रिक्वेस्ट सर्वर तक जाएगी। 

यहाँ पे गूगल के crawlers को कुल मिलाके ११ पोस्ट दिख जाती है जो SEO के ऊपर लिखी है। लेकिन उनको कैसे पता चलेगा की इनमें से कौनसी पोस्ट ज्यादा अच्छी है, जो विजिटर्स को अच्छी तरीकेसे संतुष्ट कर सके।

ऐसे में crawlers confuse हो जाता है। उन्हें पता नहीं चलता की कौन सी पोस्ट दिखाई जाएं। ऐसे में गूगल का algorithm काम आता हैं। इस algorithm में २०० से भी ज्यादा फॅक्टर्स है जिसकी मदद से गूगल हर एक पोस्ट को रैंकिंग देता है। Algorithm का निर्माण ही इसलिए किया गया है की लोगों तक अच्छी से अच्छी जानकारी पहुँच सके। 

यहाँ पे ये तो पता चल गया की algorithm की जरुरत क्यों हैं। लेकिन ये जो algorithm है वो एक टॉप सीक्रेट हैं। इस algorithm को पूरी तरह से समझना लगभग ना के बराबर हैं और गूगल ये algorithm हमेशा अपडेट करता रहता है।

मान लीजिए आज आपकी वेबसाइट top position पर रैंक कर रही है क्यूंकि आपकी वेबसाइट गूगल की algorithm को संतुष्ट कर रही है। ऐसे में गूगल जब algorithm अपडेट करता है तो आपकी वेबसाइट उसमें fit नहीं होती और आपकी रैंकिंग कम हो जाती है। 

मतलब आपको अपडेट की अनुसार वेबसाइट में बदलाव करना होगा। बहुत सारे एक्सपर्ट है जो इस algorithm को समझने की कोशिश करते है और कुछ हद तक समझ भी जाते है। यहाँ पे गूगल भी अपनी ब्लॉग की माध्यम से अपडेट की बारे में बताता रहता है। Google webmaster central blog पर आप इसके बारे में पढ़ सकते हैं । 

ये तो सच है की गूगल की algorithm को पूरी तरह से समझा नहीं जा सकता लेकिन इसके कुछ basic factors है जो कभी बदलते नहीं। अगर हम इन basic factors समझते है तो SEO करना आसान हो जाता है।

यहाँ पे content, content length, backlink, site speed, redirection etc. जैसे बहुत सारे फॅक्टर्स है। ये जो फॅक्टर्स है इसके बारे में बहुत सारी गलतफैमिया है जिसपे आज हम थोड़ी नजर डालते है जिसे आपको एक अंदाजा आएगा की किस फॅक्टर पे ज्यादा फोकस करना है। 

1. Content and content length

बहुत सारे लोगोंमें ये गलतफैमी है की गूगल हमेशा लम्बे पोस्ट को ही रैंककरता है। लेकिन, गूगल के पहले पेज पर रैंक होने वाले पोस्ट की लम्बाई साधारण १९०० शब्दों की होती है। यहाँ से आप अंदजा लगा सकते है की रैंक करनेके लिए आपको ३००० या ४००० शब्दों की पोस्ट लिखना जरुरी नहीं है। दरअसलपोस्ट की लम्बाई topic के ऊपर निर्भर होती है। आप पहले विजिटर्स के इरादेको जानने की कोशिश कीजिये और उसके हिसाब से पोस्ट लिखिए।


उदा.

Case १

SEO 


जब विजिटर्स सर्च इंजिन में SEO सर्च करता है तो उसको SEO के बारे में पूरी जानकारी चाहिए होती है। SEO क्या है, कैसे किया जाता है, उसके प्रकार कौन-कौनसे है इ.।


मान लीजिये आप अगर किसी प्रोसेस के बारे में जानकारी दे रहे है या फिर कोई गाइड लिख रहे है तो आपको २००० शब्दों तक याफिर उससे भी ज्यादा शब्दों की पोस्ट लिखनी होगी।


Case २

What is SQL agent ?


यहाँ पे विज़िटर्स को सिर्फ SQL agent क्या है सिर्फ इतना ही जानना है। उनको और कोई इंट्रेस्ट नहीं है बाकि आपने उसमें और क्या लिखा है।


अगर आप सर्च बॉक्स में What is SQL agent लिखते है तो आपके सामने का रिजल्ट दिखेगा।


google SERP

आप देख सकते है की Techopedia की पोस्ट यहाँ रैंक कर रही है। Techopedia वेबसाइट के बहुत सारे कीवर्ड है जो पहले नंबर पे रैंक कर रहे है। मजे की बात ये हैं की इस वेबसाइट की जो पोस्ट्स है वो सिर्फ लगभग २०० शब्दों की ही है।


example of short content

ये वेबसाइट सिर्फ डेफिनेशन बताती है। यहाँ पे साफ़ पता चलता है की पोस्ट की लम्बाई रैंकिंग में मदद नहीं करती। अगर content विजिटर्स को संतुष्ट करता है तो पोस्ट की लम्बाई कोई मायने नहीं रखत, चाहे वो ४००० शब्दों का हो या फिर २०० शब्दों का हो।

 2. Backlinks

Backlink रॅंकिंग का सबसे बड़ा फॅक्टर है। ( T & C apply ).

आजकल हर कोई बैकलिंक पीछे भाग रहा है। सबको लगता है की बैकलिंक की वजह से साइट रैंक होती है। ये बात तो सही है लेकिन यहाँ पे कुछ नियम और शर्ते लागु है जिसे लोग जानबूझकर नजरअंदाज करते है। 

गूगल बैकलिंक को एक ranking factor की नजर से देखता है। ज्यादा बैकलिंक का मतलब है ज्यादा ट्रस्ट।

लेकिन, यहाँ पे एक चीज़ है जो बहुत मायने रखती है और वो है relevancy याने की संबंधता। अगर आप ranking के लिए बैकलिंक बना रहे है तो आपको relevancy पे फोकस करना होगा। क्यूंकि बैकलिंक की Quality ही है जो रैंकिंग में हेल्प करती है ना की उसकी Quantity।

आप जब ऐसी एक relevant quality बैकलिंक लेते है तो ये बैकलिंक १०० irrelevant बैकलिंक से ज्यादा पावरफुल होती है। यहाँ आप समझ सकते है की relevancy कितनी महत्वपूर्ण हैं।

इसलिए आप सिर्फ quality backlink पे फोकस करनी चाहिए ना की quanatity पे।

3. Keyword focus and highlight

क्या आप भी main keyword को फोकस करने के लिए keyword को ज्यादा highlight करते है ताकि गूगल के crawler को ये समझ आये की आपका main keyword कौन सा है ?


शायद हम में से बहुत सारे लोग ऐसा ही करते है। आजसे कुछ साल पहले ये पैंतरा बहुत चलता था। लोगों ने इस तकनीक का इस्तेमाल कर के उनकी वेबसाइट रैंक कराई थी।

लेकिन जैसे algorithm अपडेट होता गया, वैसे ही ऐसी वेबसाइट की रैंकिंग कम होती गयी।


आज ऐसे बिना वजहसे keyword highlight करनेसे कुछ फायदा नहीं होता। ज्यादा highlight करने से user experience खराब हो जाता है। इसे आपका bounce rate भी बढ़ जायेगा।


User experience ध्यान में रखते हुए आप keyword highlight कर सकते है।


Keyword focus के बारे यही बात है। अगर आप main keyword बिनावजह से टारगेट कर रहे है तो वह एक bad impression होता है। इसे keyword stuffing कहां जाता है।


keyword stuffing एक Black hat SEO का प्रकार है जो गूगल की नजर में किसी गुन्हे से काम नहीं है।


keyword stuffing से आपकी वेबसाइट को पेनल्टी मिल सकते है। इसलिए आप natural तरीकेसे कीवर्ड टारगेट कीजिये।

४. Backlink building service

 Backlink service बहुत बड़ा स्कॅम है। आजमार्केट में बहुत सारी ऐसी एजेंसी उपलब्ध है जो आपको बैकलिंक बनाके देतेहै। इन्हमेंसे कुछ ही ऐसी एजेंसी है जो अच्छी अच्छी बैकलिंक बनाके देते है।

नए ब्लॉगर रैंकिंग की चक्कर में ऐसी एजेंसी से बैकलिंक सर्विस खरीद लेतेहै। लेकिन ज्यादातर एजेंसी irrelevant backlink बनाके देती हैं। ऐसी बैकलिंक का फायदा नहीं होता।

उन बकलिंकमें अगर कोई बैकलिंक ऐसी वेबसाइट सेआती है जिसका spam score ज्यादा होता है तो इसका नुक्सान आपके वेबसाइट कोभी हो सकता है।

इसलिए अगर आपका बजेट ज्यादा है तो आप किसी अच्छे एजेंसी केसाथ जा सकते है, नहीं तो आप खुद ही बैकलिंक बना सकते है।

५. Website speed

 वेबसाइट का स्पीड एक रैंकिंग फैक्टर है क्यूंकि ये user experience के बारे में है। एक रिसर्च में ये साबित हो चूका है की अगर आपकीवेबसाइट खुलने में ३ सेकण्ड्स से ज्यादा समय लगता है तो विजिटर्स आपकीवेबसाइट को क्लोज कर के किसी दूसरे वेबसाइट पर चले जाते है।


गूगल को भी ऐसीवेबसाइट पसंद है। अगर आप को भी रैंकिंग बढ़ानी है तो आपको भी काम करना होगा।

६. Robots.txt and XML Sitemaps

Robots.txt और XML sitemap कोई ranking factor नहीं है। Sitemap आपके वेबसाइट का map होता हैं जो Google के crawlers को आपके वेबसाइट के सारे पेजेस के बारे में जानकारी देता है।


लेकिन आप ये sitemap बनाते नहीं है तो भी google crawler आपके website pages को crawl करता हैं। Sitemap सिर्फ crawlers का काम आसान करता है। आप नहीं भी बनाते तो इसका रैंकिंग पे कोई फर्क नहीं पड़ता।


 robots.txt के बारे में भी यही बात लागु होती है। हालांकि Robots.txt और XML sitemap बनाने से गूगल का काम थोड़ा आसान होता है इसलिए आप इसे जरूर बनाइये।

७. Poor SEO मतलब poor traffic?

SEO को लेकर लोगोंमें बहुत साड़ी गलतफैमिया है।

हम सबको पता है की वेबसाइट से कमाई करनी है तो ट्रैफिक लाना जरुरी है और ट्रैफिक तभी आएगा जब आप seo करके वेबसाइट रैंक होगी। लेकिन यहाँ पे एक बात समझ लीजिये। SEO तभी मैटर करता है जब आपको organic traffic चाहिए होता है।

अगर आप के social media पर बहुत ज्यादा followers है तो आपको organic traffic कोई जरुरत नहीं है। social media की माध्यम से आप बहुत सारा ट्रैफिक ला सकते है।

आज भी इंटरनेटपे बहुत सारी ऐसी वेबसाइट है जो सिर्फ social media की माध्यम से ढेर सारा ट्रैफिक ला रहे है। अगर आप भी seo किये बिना ट्रैफिक लाना चाहते है तो सिर्फ Basic SEO कीजिये और social media पे अपना network स्ट्रांग कीजिये।


८. Spelling and Grammar 

Spelling और grammer ये दो फैक्टर Bing search engine के लिए थोडे बहुत जरुरी है। गूगल में ये रैंकिंग में कुछ डायरेक्ट हेल्प नहीं करते लेकिन यहाँ पे user experience की बात आती है आपको प्रोब्लेम जरूर होगा।

गूगल का ज्यादा फोकस user experience पे होता है। user experience के मामले में गूगल कोई भी compramize नहीं करता। Spelling और grammer mistake users का experiencr खराब करते है तो आपको रैंकिंग होने में तकलीफ हो सकती है।

इसलिए आप Spelling और grammer पे थोड़ा ध्यान दीजिये।

9. Without backlinks ranking is impossible?

ये बिलकुल झूठ  है। 

आज बहुत सारी ऐसी वेबसाइट्स है जिनके keywords बिना बैकलिंक के पहले पेज पर रैंक कर रहे है। हमने ऊपर ही पढ़ा है की गूगल के २०० से भी ज्यादा factors है जिनपे ये रैंकिंग तय होता है।

इन बहुत सारे ranking factors में से एक बैकलिंक है। मतलब हम २०० से भी फैक्टर्स होने के बावजूद सिर्फ एक ही फैक्टर के ऊपर बहुत ज्यादा फोकस करते है। मानाकी बैकलिंक सबसे पॉवरफुल फैक्टर है लेकिन बाकि भी फैक्टर्स महत्वपूर्ण है तो उनपे भी हमें फोकस करना चाहिए।

आप बैकलिंक के ऊपर ज्यादा ध्यान न दे के content और user experience पे ज्यादा ध्यान दे।

Summery


हमने सीखा ..


Google के पास एक algorithm है जिसकी मदद से वो रैंकिंग तय करते है।

  1. Content की लम्बाई रैंकिंग में मदद नहीं करती।
  2. Relevant backlinks  रैंकिंग का सबसे बड़ा factor है।
  3. Main keyword ज्यादा फोकस करने से user experience खराब होता है।
  4. अपनी backlink खुद बनाइये। अगर समय नहीं है तो किसी अच्छी agency से बनाइये।
  5.  पोस्ट लिखते समय grammar के ऊपर ध्यान दे।
  6. वेबसाइट की स्पीड पे ध्यान दीजिये क्यों की ये एक रैंकिंग फैक्टर है।
  7. XML site map और  robots.txt रैंकिंग में मदद नहीं करते लेकिन आप इसका इस्तेमाल जरूर करे।
  8. Main keyword को ज्यादा टारगेट करने से keyword stuffing कीप्रोब्लेम आ सकती है जिसे पेनल्टी लग सकती है।
  9. सिर्फ SEO करने से ट्रैफिक नहीं आएगा , Social media पे भी उसे share करना पड़ेगा।
  10. बैकलिंक के बिना भी हम १स्ट पेज पे रैंक कर सकते है।

अगर आपको कीवर्ड या वेबसाइट रैंक करना है तो long tail keyword पे ज्यादा ध्यान दीजिये, उसका अच्छी तरह से SEO कीजिये, social media पे शेयर कीजिये। हमने देखा की कितनी साड़ी गलतफैमिया है जिसपे हम आँख बंद करके विश्वास करते है। गूगल का mission यही है की वो अपने यूजर को अच्छी से अच्छी सर्व्हिस दे सके। आप भी अगर यूजर को ध्यान में रखते हुए content लिखिए। रैंकिंग फैक्टर को लेकर आपको बहुत सारी राय मिलेगी लेकिन आप खुद ही अनुभव लेके उसपे विश्वास कीजिये। गूगल की official website पे उनकी algorithm के बारे में पढ़िए। आप ज्यादा समझने की कोशिश मत करें क्यूंकि ये एक बहुत बड़ी पहेली है।

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